बेअदब
खुद से जब आँख मिलाता हूँ तो ग़ज़ल होती है दिल के हालात बताता हूँ तो ग़ज़ल होती है
शनिवार, 3 मार्च 2012
पुरानी याद के मंजर ख्यालों से गुजरते हैं
तुम्हें हम क्या बताएं दिन मेरे कैसे गुजरते है
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