बेअदब
खुद से जब आँख मिलाता हूँ तो ग़ज़ल होती है दिल के हालात बताता हूँ तो ग़ज़ल होती है
तुम्हारी याद
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शनिवार, 18 फ़रवरी 2012
गुरुवार, 10 नवंबर 2011
तुम्हारी
याद
माना
इबादत
तो
नहीं
मगर
दोनों
का
मंजर
एक
सा
है
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