बेअदब
खुद से जब आँख मिलाता हूँ तो ग़ज़ल होती है दिल के हालात बताता हूँ तो ग़ज़ल होती है
मंगलवार, 23 अक्टूबर 2012
ग़ज़ल थी, न काफिया न बहर था बहुत
उसकी बातों में मगर असर था बहुत
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