मौन जब जब बोलता है
अवनि अम्बर डोलता है
चाँद यूँ ही चाँद नहीं हो जाता
देखने वालों की नजर का असर पड़ता है
तुम्हारी याद माना इबादत तो नहीं
मगर दोनों का मंजर एक सा है
१. गम ये नहीं कि ग़मों का समंदर मिरे आगे
गम ये कि अब हमें कोई गम नहीं होता
२ कब्र में आ के भी बेअदब निकला
अपनी कौफिन से बड़ा निकला