शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

इस शहर में कुछ खास खास लगता है
शायद कोई आस पास रहता है
कहने को मेरे पास बहुत कम था
एक तेरा गम था एक मेरा गम था

शुक्रवार, 20 जनवरी 2012

मौन जब जब बोलता है
अवनि अम्बर डोलता है
चाँद यूँ ही चाँद नहीं हो जाता
देखने वालों की नजर का असर पड़ता है

गुरुवार, 10 नवंबर 2011

तुम्हारी याद माना इबादत तो नहीं
मगर दोनों का मंजर एक सा है

सोमवार, 3 मई 2010

१. गम ये नहीं कि ग़मों का समंदर मिरे आगे
गम ये कि अब हमें कोई गम नहीं
होता

कब्र में के भी बेअदब निकला
अपनी कौफिन से बड़ा निकला